The smart Trick of Subconscious Mind That No One is Discussing






दूसरे दिन मैं ज्यों ही दफ्तर में पहुंचा चोबदार ने आकर कहा-महाराज साहब ने आपको याद किया है।

वह भोली थी मगर ऐसी नादान न थी। मेरी खुमार-भरी आंखे और मेरे उथले भाव और मेरे झूठे प्रेम-प्रदर्शन का रहस्य क्या उससे छिपा रह सकता था? लेकिन उसकी रग-रग में शराफत भरी हुई थी, कोई कमीना ख़याल उसकी जबान पर नहीं आ सकता था। वह उन बातों का जिक्र करके या अपने संदेहों को खुले आम दिखलाकर हमारे पवित्र संबंध में खिचाव या बदमज़गी पैदा करना बहुत अनुचित समझती थी। मुझे उसके विचार, उसके माथे पर लिखे मालूम होते थे। उन बदमज़गियों के मुकाबले में उसे जलना और रोना ज्यादा पसंद था, शायद वह समझती थी कि मेरा नशा खुद-ब-खुद उतर जाएगा। काश, इस शराफत के बदले उसके स्वभाव में कुछ ओछापन और अनुदारता भी होती। काश, वह अपने अधिकारों को अपने हाथ में रखना जानती। काश, वह इतनी सीधी न होती। काश, अव अपने मन के भावों को छिपाने में इतनी कुशल न होती। काश, वह इतनी मक्कार न होती। लेकिन मेरी मक्कारी और उसकी मक्कारी में कितना अंतर था, मेरी मक्कारी हरामकारी थी, उसकी मक्कारी आत्मबलिदानी।

However, the inspiration to fulfill a need is a singular kind of dream all By itself and independent from precognitive goals. There’s an even better solution out there!

मेरा गुस्सा जरा धीमा हुआ। बोला-तुमने उससे क्या कहा?

सुमति खुद को संभाल न सकी, और वो अपने ही नर्म मुलायम सुडौल स्तनों को दबाने को बेताब थी. सिर्फ सोच कर ही वो मचल उठी थी..

इंदूमति ने संभलकर जवाब दिया—तुम अपने दिल में इस वक्त जो ख्याल कर रहे हो उसे एक पल के लिए भी वहां न रहने दो , वर्ना समझ लो कि आज ही इस जिंदगी का खात्मा है। मुझे नहीं मालूम था कि तुम मेरे ऊपर जो जुल्म किए हैं उन्हें मैंने किस तरह झेला है और अब भी सब-कुछ झेलने के लिए तैयार हूँ। मेरा सर तुम्हारे पैंरो पर है, जिस तरह रखोगे, रहूँगी। लेकिन आज मुझे मालूम हुआ कि तुम खुद हो वैसा ही दूसरों को समझते हो। मुझसे भूल अवश्य हुई है लेकिन उस भूल की यह सजा नहीं कि तुम मुझ पर ऐसे संदेह न करो। मैंने उस औरत की बातों में आकर more info अपने सारे घर का चिट्ठा बयान कर दिया। मैं समझती थी कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिये लेकिन कुछ तो उस औरत की हमदर्दी और कुछ मेरे अंदर सुलगती हुई आग ने मुझसे यह भूल करवाई और इसके लिए तुम जो सजा दो वह मेरे सर-आंखों पर।

Should the aspiration dictionary’s definition of the symbol is insufficient, test examining the desire throughout the context of your own private lifetime. Test to determine yourself if there is a rationale this graphic, particular person, or factor is showing inside your goals.[fourteen]

अचानक ही सुमति के दिमाग में पुरानी यादें आने लगी जब वो रक्षाबंधन के त्यौहार पे अपने भाई के हाथो पे राखी बाँधा करती थी. यह सच नहीं हो सकता, आखिर मैं कभी बहन थी ही नहीं. मेरा दिमाग मेरे साथ क्या खेल खेल रहा है?

subconscious mental action: a time period, now obs. in psychiatry, that was formerly made use of to include the preconscious

Envision yourself staying thriving in your job. Photo by yourself sitting at the rear of a loaded, mahogany desk. Imagine each and every element from what you're carrying to what your gold desk plate says.

बड़े भाई के रूप में भी सुमति अपने छोटे भाई रोहित को हमेशा से ही प्यार करती थी और उसका ध्यान रखती थी.

सुमति को वो यादें आने लगी जब वो रक्षाबंधन के त्यौहार पर रोहित को राखी बांधती थी. पर वो तो कभी रोहित की बहन थी ही नहीं.

“जुग जुग जियो बेटी!”, उसके ससुर प्रशांत ने उसे आशीर्वाद दिया. “बेटी तुम्हारी जगह मेरे कदमो में नहीं मेरे दिल में है.”, उसकी सास कलावती ने नज़र उतारते click here हुए सुमति को फिर गले से लगा लिया. गले लगाते ही सुमति को माँ का check here प्यार महसूस हुआ. सुमति के चेहरे पर एक ख़ुशी भरी मुस्कान थी. उसे ऐसा अनुभव तो मधुरिमा के साथ भी होता था जो उसकी क्रॉस-ड्रेसर माँ थी.

We use cookies to boost your expertise on our Internet site. By continuing to implement our Internet site, you're agreeing to our usage of cookies. You are able to adjust your cookie configurations at any time.ContinueFind out much more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *